







गोण्डा, 13 मार्च 2026।जिले में स्कूलों द्वारा संचालित वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। अब बिना फिटनेस के बच्चों को ले जाने वाले स्कूली वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई वाहन बिना वैध फिटनेस के बच्चों को ले जाते हुए पाया गया, तो संबंधित विद्यालय के प्रबंधक या प्रधानाचार्य के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।
एआरटीओ आर.सी. भारतीय ने बताया कि शासन द्वारा स्कूली वाहनों के संचालन को लेकर उत्तर प्रदेश मोटर यान नियमावली 2019 का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत सभी स्कूल बसों का फिटनेस प्रमाणपत्र वैध होना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि स्कूल बस पीले रंग की होनी चाहिए तथा उसके आगे और पीछे ‘विद्यालय बस’ लिखा होना चाहिए। साथ ही दोनों साइड में विद्यालय का नाम अंकित होना जरूरी है। बस के दरवाजों पर सुरक्षित ताले, आगे के पायदान पर हैंड रेल तथा छत पर मजबूत और फिसलन रहित होल्डिंग रॉड लगी होना अनिवार्य है।
इसके अलावा बस में पारदर्शी फर्स्ट एड बॉक्स, बीआईएस मार्क के दो अग्निशामक यंत्र, एक आपातकालीन द्वार और एक आपातकालीन खिड़की होना आवश्यक है। आपातकालीन द्वार का आकार 55×120 सेमी होगा, जबकि पीछे की ओर 150×120 सेमी का टफन ग्लास वाली आपातकालीन खिड़की होगी, जिसे तोड़ने की भी पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। खिड़कियों पर रॉड या जाली लगाई जाएगी, ताकि विद्यार्थी अपना सिर बाहर न निकाल सकें।
एआरटीओ ने बताया कि बस में विद्यार्थियों को चढ़ाने-उतारने के समय चेतावनी देने वाला प्रकाश, लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और सीसीटीवी कैमरे भी अनिवार्य होंगे। साथ ही बस की फर्श जर्जर नहीं होनी चाहिए और परिचर की व्यवस्था भी जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन नियमों की अनदेखी के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रबंधन की होगी और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Author: HIND LEKHNI NEWS
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