1983 में रखी गई थी सड़क की नींव, 43 साल बाद भी बदहाल

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गड्ढों और जलभराव के बीच जान जोखिम में डालकर गुजर रहे राहगीर, बछरावां से बीएचईएल-जगदीशपुर व अयोध्या तक कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण मार्ग

महराजगंज/रायबरेली। विकास के दावों के बीच महराजगंज क्षेत्र में सड़कों की बदहाली जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। बछरावां से हलोर, जमुरावां, सेमरौता होते हुए इंडस्ट्रियल एरिया, बीएचईएल जगदीशपुर और अयोध्या को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग का जमुरावां-कोटवा मोहम्मदाबाद के बीच का हिस्सा इन दिनों गहरे गड्ढों और जलभराव के चलते राहगीरों के लिए मुसीबत बना हुआ है। बारिश के बाद सड़क की स्थिति ऐसी हो जाती है कि पूरा मार्ग तालाब में तब्दील नजर आता है।

सड़क पर जगह-जगह बने बड़े गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। बाइक और साइकिल सवारों के लिए यह मार्ग हादसे का सबब बना हुआ है, जबकि पैदल राहगीरों को कीचड़ और जलभराव के बीच आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली से रोजमर्रा के आवागमन के साथ क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास की रफ्तार भी प्रभावित हो रही है।

लंबे समय से बनी है समस्या

क्षेत्रीय निवासी कुलदीप मिश्रा, सच्चिदानंद त्रिपाठी, अमित उर्फ मोनू त्रिपाठी और राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि मार्ग पर लंबे समय से गहरे गड्ढे बने हुए हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। पानी भर जाने के बाद सड़क और गड्ढों के बीच अंतर दिखाई नहीं देता, जिससे वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार बाइक और साइकिल सवार असंतुलित होकर गिर भी चुके हैं।

कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ता है मार्ग

ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग महज दो गांवों के बीच का संपर्क रास्ता नहीं है, बल्कि बछरावां से हलोर, जमुरावां, सेमरौता होते हुए औद्योगिक क्षेत्र, बीएचईएल जगदीशपुर और अयोध्या तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी का हिस्सा है। मार्ग का समुचित निर्माण और सुदृढ़ीकरण होने से आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को आवागमन में बड़ी राहत मिल सकती है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क के दुरुस्त होने से बछरावां क्षेत्र से इन महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने में करीब 30 से 40 किलोमीटर तक की दूरी कम हो सकती है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।

43 साल बाद भी सड़क की हालत बदहाल

ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क की नींव वर्ष 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में रखी गई थी। चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सड़क का यह हिस्सा आज भी बदहाली का शिकार है। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।

करोड़ों के विकास के बीच उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सड़क और अन्य विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग गड्ढों में तब्दील है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार विभाग इस सड़क की दुर्दशा को कब गंभीरता से लेगा।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कराकर गुणवत्तापूर्ण मरम्मत अथवा आवश्यकता के अनुसार पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क के दुरुस्त होने से आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को राहत मिलेगी और औद्योगिक क्षेत्र, बीएचईएल-जगदीशपुर तथा अयोध्या तक आवागमन भी सुगम होगा।

जलभराव खत्म होते ही शुरू होगा मरम्मत कार्य।

मामले में जेई विजय साहू ने बताया कि वर्तमान में मार्ग पर जलभराव है। जलभराव समाप्त होते ही सड़क की मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।

HIND LEKHNI NEWS
Author: HIND LEKHNI NEWS

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