करोड़ों के सौंदर्यीकरण पर उठे सवाल, धार्मिक आस्था के केंद्र पर नगर पालिका की लापरवाही का आरोप

कर्नलगंज, गोण्डा। एक ओर जहां सकरौरा घाट को धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग एवं उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम लिमिटेड द्वारा सौंदर्यीकरण कराया गया, वहीं दूसरी ओर आज यह पवित्र स्थल बदहाली और अव्यवस्था की मार झेलता नजर आ रहा है। हिंदू धर्म सेवा दल ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका परिषद की लापरवाही के चलते मंदिर परिसर और उसके आसपास कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था आहत हो रही है।

मान्यता है कि सकरौरा घाट भगवान श्रीराम के वन प्रवास से जुड़ा हुआ है तथा निकट ही महर्षि अगस्त्य की तपोभूमि स्थित है। इसके अलावा सिद्ध पुरुष स्वर्गीय बाबा आत्माराम एवं बाबा मलूकदास की समाधियां भी यहां मौजूद हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले इस स्थल पर आज भी अनेक प्राचीन मंदिर मौजूद हैं, जिनके आसपास फैली गंदगी और कूड़े के ढेर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ मंदिरों को क्षति पहुंचाने के प्रयास भी हुए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार राम जानकी मंदिर ट्रस्ट की भूमि पर वन विभाग द्वारा बड़ी संख्या में पौधरोपण कर क्षेत्र को हराभरा बनाया गया था, लेकिन कूड़े के लगातार ढेर लगने से कई पुराने नीम के पेड़ सूख चुके हैं और पूजनीय पीपल का पेड़ भी इसकी चपेट में आता दिखाई दे रहा है। मामले में जब पूर्व चेयरमैन रामजी लाल मोदनवाल एवं वर्तमान चेयरमैन प्रतिनिधि रामजी लाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, यदि वहां कूड़ा डाला गया है तो तत्काल जेसीबी भेजकर हटवाया जाएगा। वहीं नगर पालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी सुरभि पाण्डेय तथा उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
अब बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थल को पर्यटन और धार्मिक पहचान दिलाने के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए, वहां आखिर कूड़े का अंबार किसकी जिम्मेदारी पर खड़ा हो गया? क्या प्रशासन इस ऐतिहासिक और आस्था के केंद्र को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा या फिर विकास के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?
Author: HIND LEKHNI NEWS
सच्चाई की राह कठिन जरूर है, लेकिन यही राह समाज को जागरूक, सशक्त और बेहतर कल की ओर ले जाती है।







