सकरौरा घाट पर धुआं-धुआं हुआ पर्यावरण, श्रद्धालुओं ने पूछा—क्या यही है विकास?

कर्नलगंज, गोण्डा। सकरौरा घाट पर फैले कूड़े के साम्राज्य को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार भले ही हरकत में आते दिखाई दिए हों, लेकिन कूड़ा हटाने के बजाय उसमें आग लगवा दिए जाने की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि खबर के बाद कार्रवाई दिखाने के लिए कूड़े के विशाल ढेर में आग लगवा दी गई, जिससे पूरे क्षेत्र में जहरीला धुआं फैल गया और आसपास के मंदिरों, आश्रमों तथा आबादी वाले इलाकों पर खतरा मंडराने लगा।सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार दोपहर से सुलग रही आग शुक्रवार देर शाम तक धधकती रही। आग बढ़ने पर नगर पालिका कर्मचारियों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची दमकल टीम ने आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन कूड़े के ढेर से उठता धुआं देर तक लोगों को परेशान करता रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से बदबू और प्रदूषण के बीच घुट-घुटकर जीवन जीने को मजबूर हैं।
विडंबना यह है कि जिस दिन पूरा देश विश्व पर्यावरण दिवस मना रहा था, उसी दिन सकरौरा घाट के आसपास रहने वाले लोग स्वच्छ हवा और प्रदूषण मुक्त वातावरण के लिए भगवान से प्रार्थना करते नजर आए। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर जिस धार्मिक एवं पर्यटन स्थल का सौंदर्यीकरण किया गया, वहां आज कूड़े के पहाड़ और धुएं के बादल विकास के दावों की पोल खोल रहे हैं।गौरतलब है कि सकरौरा घाट धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम के वनगमन से जुड़ी इस पावन भूमि के निकट महर्षि अगस्त्य की तपोभूमि स्थित है। वहीं सिद्ध संत बाबा आत्माराम और बाबा मलूकदास की समाधियां भी यहां मौजूद हैं। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के बीचों-बीच कूड़े के अंबार और उसमें लगी आग ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत कर दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राम जानकी मंदिर ट्रस्ट की भूमि पर वर्षों पूर्व वन विभाग द्वारा लगाए गए कई पेड़ कूड़े और प्रदूषण की वजह से प्रभावित हो चुके हैं। अब पूजनीय पीपल का पेड़ भी खतरे की जद में बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कूड़ा हटाने और सफाई की व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में यह क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय संकट का शिकार हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर धार्मिक और पर्यटन स्थल पर कूड़ा फेंकने की अनुमति किसने दी? खबर सामने आने के बाद कूड़ा हटाने के बजाय उसमें आग लगाने का फैसला किस स्तर पर लिया गया? और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या फिर मामला कुछ दिनों बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
सकरौरा घाट आज एक सवाल बनकर खड़ा है—क्या करोड़ों के सौंदर्यीकरण के बाद भी आस्था और पर्यावरण की रक्षा नहीं हो पाएगी?
Author: HIND LEKHNI NEWS
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