विश्व पर्यावरण दिवस पर किसानों को दी गई जलवायु-अनुकूल खेती एवं पर्यावरण संरक्षण की जानकारी

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करमडीह कलां (गोण्डा)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पीपुल एक्शन फॉर नेशनल इंटीग्रेशन (पानी संस्थान) द्वारा संचालित कार्बन किसान कनेक्ट (सीकेसी) परियोजना के अंतर्गत सदाशिव इंटर कॉलेज, करमडीह कलां में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।कार्यक्रम में ग्राम प्रधान लल्लन तिवारी, प्रगतिशील महिला एवं पुरुष किसान, सीकेसी परियोजना के एरिया कॉर्डिनेटर आदित्य यादव, अजय सिंह, शशांक सिंह, रंजीत घोष, देवेंद्र सिंह सहित लोकल रिसोर्स पर्सन और पुरस्कार परियोजना से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।वक्ताओं ने कहा कि बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभाव हैं, जिनका सबसे अधिक असर किसानों और कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। समुदाय विशेषज्ञ रमाशंकर ने किसानों को धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि यह जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धति है, जिससे पानी एवं श्रम की बचत होती है तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है।

सीकेसी परियोजना के एरिया कॉर्डिनेटर आदित्य यादव एवं अजय सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल अवशेषों को जलाना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन तथा वनों की कटाई पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष न जलाने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने, अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग की अपील की।कार्यक्रम के दौरान किसानों को मोबाइल आधारित मौसम पूर्वानुमान सेवाओं की जानकारी भी दी गई, जिससे वे मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की बेहतर योजना बना सकें और संभावित जोखिमों को कम कर सकें।पुरस्कार परियोजना के क्षेत्र समन्वयक रमेश वर्मा ने बताया कि पानी संस्थान द्वारा संचालित कार्बन किसान कनेक्ट एवं पुरस्कार परियोजनाओं से जुड़कर किसान डीएसआर, मौसम आधारित कृषि प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा अन्य जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इससे जल संरक्षण, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और कृषि की टिकाऊ उत्पादकता सुनिश्चित होती है।

कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों, परियोजना अधिकारियों एवं किसानों ने वृक्षारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया।

HIND LEKHNI NEWS
Author: HIND LEKHNI NEWS

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