
गोण्डा। करनैलगंज के सकरौरा घाट पर जो हुआ, उसने प्रशासनिक संवेदनहीनता और सत्ता के कथित दुरुपयोग की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। वर्षों पुराना आस्था का केंद्र ठा० राम जानकी मंदिर जेसीबी मशीनों से मिट्टी में मिला दिया गया और पूरा प्रशासन तमाशबीन बना रहा। हैरानी की बात यह है कि यह सब तहसील मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर हुआ, लेकिन जिम्मेदार अफसरों को भनक तक नहीं लगी या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं।

मंदिर से जुड़े सर्वराकार घनश्यामदास द्वारा मण्डलायुक्त देवीपाटन मण्डल को भेजी गई शिकायत में नगर पालिका परिषद करनैलगंज के चेयरमैन पति एवं प्रतिनिधि रामजी लाल मोदनवाल पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक 24 मई 2026 को जेसीबी मशीन लगवाकर प्राचीन मंदिर को बेरहमी से ढहा दिया गया। श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने विरोध किया, गुहार लगाई, लेकिन सत्ता के आगे किसी की एक न चली।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस मंदिर और उसकी भूमि के प्रशासक स्वयं उपजिलाधिकारी करनैलगंज बताए जा रहे हैं, वहां इतनी बड़ी कार्रवाई आखिर किसकी शह पर हुई? क्या प्रशासन पूरी तरह बेखबर था या फिर सब कुछ मिलीभगत से हुआ? अगर प्रशासन को जानकारी नहीं थी तो यह घोर लापरवाही है, और अगर जानकारी थी तो यह आस्था के खिलाफ खुला अपराध माना जाएगा।

आरोप है कि मंदिर से जुड़ी करीब 11 एकड़ भूमि, जहां वर्षों से धार्मिक मेले और पूजा-पाठ होते रहे, वहां अब नगर पालिका द्वारा कूड़े का अंबार लगाया जा रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह केवल जमीन कब्जाने का मामला नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं और धार्मिक भावनाओं पर सीधा हमला है। लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि जहां कभी घंटियां बजती थीं, वहां अब कूड़े के ढेर सड़ रहे हैं।घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा भी राजनीतिक रसूख और सत्ता की मर्जी पर निर्भर करेगी? यदि मंदिर तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता आखिर किस पर भरोसा करे?
शिकायतकर्ता ने मण्डलायुक्त से पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन सच में कार्रवाई करता है या फिर मामला फाइलों में दबाकर जनता की आस्था का अपमान यूं ही नजरअंदाज कर दिया जाएगा।
Author: HIND LEKHNI NEWS
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