







चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ आज माता रानी की भक्ति के साथ हो गया। इस पावन पर्व के पहले दिन माँ दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। देशभर के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
माँ शैलपुत्री की महिमा
नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की उपासना का विशेष महत्व है। यह पर्व शक्ति और साधना का प्रतीक माना जाता है। देवी शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और इन्हें नंदी पर सवार, त्रिशूल धारण किए हुए और एक हाथ में कमल पुष्प लिए हुए दर्शाया जाता है।
मंदिरों में भक्ति का माहौल
वाराणसी, अयोध्या, मथुरा, उज्जैन, और हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। विशेष रूप से माता वैष्णो देवी और काशी के दुर्गा मंदिर में भक्तों ने माँ शैलपुत्री के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।
व्रत और पूजा विधि
आज के दिन भक्तजन व्रत रखकर माँ की पूजा-अर्चना करते हैं। सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद, कलश स्थापना की जाती है। घी का दीपक जलाकर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है और मां को सफेद फूल और गाय का घी अर्पित किया जाता है।
मां से सुख-शांति की कामना
नवरात्रि का यह पर्व शक्ति और आस्था का प्रतीक है। श्रद्धालु माँ दुर्गा से अपने परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं।
देशभर में उत्साह और श्रद्धा के साथ नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। अगले नौ दिनों तक मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और भजन-कीर्तन होते रहेंगे। जय माता दी!
