



गोंडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक मामले में राज्य सरकार की ओर से आवश्यक निर्देश उपलब्ध न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायालय ने गोंडा के जिलाधिकारी को 9 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। साथ ही मामले की सुनवाई स्थगित होने के कारण जिलाधिकारी को अपने वेतन खाते से 5,000 रुपये लागत जमा करने का निर्देश दिया है।

मामला रिट-सी संख्या 8686/2026, ओंकार नाथ उर्फ ओंकार नाथ वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य से संबंधित है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की अदालत में हुई।आदेश के अनुसार, 17 अगस्त 2026 को हुई पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता ने मामले में निर्देश प्राप्त करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था। अदालत ने समय देते हुए कहा था कि यदि उचित निर्देश प्राप्त नहीं होते हैं तो गोंडा के जिलाधिकारी को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।8 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उन्हें अभी तक आवश्यक निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। अदालत ने यह भी पूछा कि संबंधित अधिकारी उपस्थित क्यों नहीं हैं, लेकिन इस संबंध में अधिवक्ता कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
इस पर हाईकोर्ट ने गोंडा के जिलाधिकारी को 9 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि मामले को प्रतिवादी की ओर से स्थगित किए जाने के कारण जिलाधिकारी को 5,000 रुपये लागत के रूप में अपने वेतन खाते से भुगतान करना होगा।
न्यायालय ने मामले को अगली सुनवाई के लिए 9 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
Author: HIND LEKHNI NEWS
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