ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थलीय जांच कर बाड़ा हटाने की मांग की, अधिकारियों पर कागजी कार्रवाई का आरोप।
महराजगंज/रायबरेली। सरकार जहां पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ पशुओं के पालन के लिए आबादी से बाहर उपयुक्त स्थल विकसित करने पर जोर दे रही है, वहीं महराजगंज क्षेत्र की मोन ग्राम पंचायत के मोन गांव की कोट बस्ती में आबादी के बीच कथित रूप से संचालित सूअर बाड़े को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही जगदीश उर्फ लल्ला और गोपाल द्वारा बड़ी संख्या में सूअरों का पालन आबादी के बीच किया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बाड़े के आसपास गंदगी, कीचड़ और जलभराव की समस्या बनी रहती है, जिससे बस्ती में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश में और बिगड़ जाती है स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। सूअर बाड़े से निकलने वाली गंदगी और कीचड़ आसपास फैल जाता है। ग्रामीणों ने दावा किया कि बाड़े के आसपास रहने वाले करीब एक दर्जन से अधिक बच्चे, युवा और बुजुर्ग विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और कुछ लोगों का उपचार भी चल रहा है। हालांकि, इन बीमारियों का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
ग्राम प्रधान श्यामकला के देवर और उनके बेटे के भी गंदगी के कारण कथित रूप से स्वास्थ्य प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही है। दोनों का अस्पताल में उपचार चलने का दावा किया गया है।
तहसील दिवस में शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होने का आरोप
ग्राम प्रधान पति एवं प्रतिनिधि अमरेश कुमार का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार तहसील दिवस में शिकायत की जा चुकी है। उनका आरोप है कि तहसील दिवस में मौजूद जिलाधिकारी द्वारा मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण नहीं किया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों ने कार्यालय में बैठकर ही रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेज दी, जबकि वास्तविक स्थिति जानने के लिए मौके पर जाकर जांच किया जाना जरूरी था।
करीब 125 सूअर होने का दावा
ग्रामीणों के मुताबिक दोनों पशुपालकों के पास करीब 125 सूअर हैं, जो दिन-रात बस्ती के आसपास घूमते रहते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूअर जगह-जगह मिट्टी खोदकर गड्ढे बना देते हैं, जिनमें बारिश का पानी जमा हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सरकारी योजनाओं के तहत इंटरलॉकिंग और पक्की नालियों पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन सूअरों के कारण रास्तों पर मिट्टी और कीचड़ फैलने से इन सुविधाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भी परेशानी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि आबादी के बीच सूअर बाड़ा होने के कारण धार्मिक अनुष्ठानों और सार्वजनिक आयोजनों में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाड़े के कारण आसपास का वातावरण प्रभावित रहता है और किसी आयोजन से पहले आयोजकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
विरोध करने पर धमकी देने का भी आरोप
ग्रामीणों ने पशुपालकों पर विरोध करने वाले लोगों के साथ विवाद करने तथा उन्हें कथित रूप से हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
वहीं ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि सूअर बाड़े के समीप रहने वाला एक मौर्य परिवार लगातार गंदगी से परेशान होकर अपना पुराना घर छोड़ चुका है। ग्रामीणों के अनुसार परिवार ने गांव के बाहर नया मकान बनाकर वहां रहना शुरू कर दिया है। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रशासन से संयुक्त टीम भेजकर जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर स्थलीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो आबादी के बीच संचालित सूअर बाड़े को नियमानुसार गांव से बाहर उपयुक्त स्थान पर संचालित कराने की व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन से जुड़े परिवारों की आजीविका भी प्रभावित न हो और बस्ती के लोगों के स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं सुरक्षा से भी समझौता न हो, इसके लिए प्रशासन को नियमों के तहत स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
अब सवाल यह है कि ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन कब मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेगा और आबादी के बीच कथित सूअर बाड़े से उत्पन्न समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा?
Author: HIND LEKHNI NEWS
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