ब्लॉक परिसर में आधार सेवा पर सवाल, निजी संस्था का हवाला देकर कर्मचारी ने बताई पैसे लेने की वजह; जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर उठे सवाल
**कर्नलगंज, गोंडा।**सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी आधार कार्ड आम नागरिकों की पहचान का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन जब इसी से जुड़ी सेवाओं के नाम पर मनमाने शुल्क वसूलने के आरोप सामने आएं तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। कर्नलगंज ब्लॉक में संचालित आधार अपडेट कार्य के दौरान लोगों से कथित तौर पर प्रति व्यक्ति 200 रुपये वसूले जाने का मामला सामने आया है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह न केवल आम लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने का मामला होगा, बल्कि आधार सेवा के निर्धारित शुल्क और संचालन व्यवस्था की जांच का भी विषय है।
जानकारी के मुताबिक, कर्नलगंज ब्लॉक में शून्य से 17 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों के आधार पंजीकरण एवं अपडेट का कार्य किया जा रहा है। इसी दौरान आधार संबंधी कार्य कराने पहुंच रहे लोगों से कथित रूप से मनमाने ढंग से पैसे लिए जाने की शिकायत सामने आई है। प्रति व्यक्ति 200 रुपये वसूले जाने की बात ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। आधार जैसी आवश्यक सेवा के लिए आने वाले आम नागरिक आखिर किस नियम के तहत इतनी रकम देने को मजबूर हैं, यह जांच का अहम सवाल है।
निजी संस्था का हवाला देकर कर्मचारी ने दी सफाई
मामले की जानकारी मिलने पर जब दुकान पर कार्यरत चन्द्र केश से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि यह एक निजी संस्था है और इसमें वेतन नहीं मिलता, इसलिए उन लोगों को पैसे लेने पड़ते हैं। कर्मचारी की यह सफाई कई सवाल खड़े करती है। यदि संस्था अपने कर्मचारियों को वेतन नहीं देती, तो क्या इसकी भरपाई आधार सेवा लेने वाले नागरिकों से मनमाने तरीके से की जा सकती है? क्या किसी कर्मचारी को निर्धारित नियमों से अलग जाकर शुल्क वसूलने का अधिकार है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और अधिकृत एजेंसी को देना चाहिए।
नियमों के अनुसार शुल्क या मनमानी वसूली? जांच जरूर
आधार सेवाओं के लिए शुल्क निर्धारित व्यवस्था के तहत लिया जाता है। प्रत्येक सेवा का शुल्क एक जैसा नहीं होता; इसलिए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कर्नलगंज ब्लॉक में किस प्रकार का पंजीकरण या अपडेट किया जा रहा है और उसके लिए अधिकृत शुल्क कितना है। यदि निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूली जा रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। खासकर बच्चों के आधार पंजीकरण और अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के मामले में लागू नियमों की स्पष्ट जानकारी आम जनता को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
जिम्मेदार अधिकारी कब लेंगे संज्ञान?
ब्लॉक परिसर में आधार सेवा संचालित होने के बावजूद यदि लोगों से निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे लिए जा रहे हैं, तो यह निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि आधार केंद्र की अधिकृत स्थिति, शुल्क सूची, रसीद व्यवस्था और कर्मचारी के बयान की जांच कराएं। साथ ही, शिकायत सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि सरकारी और अधिकृत सेवाओं के नाम पर आम जनता का आर्थिक शोषण न हो।
अब सबसे बड़ा सवाल—आधार बनवाने या अपडेट कराने आए गरीब परिवारों को नियम के नाम पर राहत मिलेगी या उन्हें अपनी जेब से मनमानी रकम चुकानी पड़ेगी?
मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष और जांच का निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
**कर्नलगंज से पवनदेव सिंह की रिपोर्ट**
Author: HIND LEKHNI NEWS
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