कर्नलगंज (गोंडा)। तहसील कर्नलगंज अंतर्गत ग्राम सभा सुदीया के भगोले पुरवा स्थित पौराणिक अगस्त कुंड में प्रशासन के आदेश के बाद खुदाई और साफ-सफाई का कार्य शुरू होने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। खुदाई के दौरान लगभग 68 वर्ष पुरानी सीढ़ियां मिलने से इस स्थल की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोग इसे महर्षि अगस्त्य मुनि की तपोस्थली मानते हैं और लंबे समय से इस स्थल के संरक्षण की मांग करते रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, अगस्त कुंड आश्रम वर्षों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। आश्रम के महंत स्वर्गीय बाबा राम स्वरूप दास के शिष्य स्वर्गीय बाबा जय श्री दास जी महाराज थे, जो ग्राम सभा लालेमऊ निवासी पूर्व अध्यापक राम नेवाज सिंह के परबाबा थे। बताया जाता है कि वर्ष 2020 में राम नेवाज सिंह ने अपने पूर्वजों की स्मृति में बाबा जय श्री दास जी महाराज की समाधि सहित आश्रम परिसर के कई हिस्सों का जीर्णोद्धार एवं मरम्मत कराई थी। तब से इस स्थल की देखरेख भी उनके माध्यम से की जा रही है।
भूमि पर अवैध कब्जे की आशंका, ग्रामीणों ने जताई चिंता।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से कुछ अराजक तत्व और कथित भू-माफिया इस धार्मिक स्थल की भूमि पर नजर लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने इस जमीन को बेचने और उस पर कब्जा करने के प्रयास भी किए, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण उनकी मंशा सफल नहीं हो सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि आज भी इस पवित्र भूमि पर अवैध कब्जे की आशंका बनी हुई है। उनका डर है कि अवसर मिलते ही किसी व्यक्ति को आगे कर जमीन का बैनामा कराने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अगस्त कुंड की भूमि को राजस्व अभिलेखों में सुरक्षित दर्ज कराकर स्थायी संरक्षण प्रदान किया जाए।
किसान यूनियन ने उठाई आवाज, प्रशासन ने लिया संज्ञान।

इस पूरे मामले की जानकारी भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री प्रतापवली सिंह को हुई। उन्होंने इस पौराणिक स्थल के संरक्षण, अगस्त कुंड की खुदाई और साफ-सफाई की मांग को लेकर प्रशासन के समक्ष आवाज बुलंद की।
प्रतापवली सिंह ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री सहित विभिन्न विभागों को ज्ञापन भेजकर अगस्त कुंड के संरक्षण की मांग की। इसके बाद अनेक सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी इस अभियान का समर्थन किया। जनदबाव बढ़ने पर तत्कालीन पहल को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा ने स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद 15 जुलाई को अगस्त कुंड की खुदाई और सफाई का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया, जिसके बाद कार्य शुरू कराया गया।
खुदाई में निकलीं 68 वर्ष पुरानी सीढ़ियां।
खुदाई के दौरान पत्थर से निर्मित प्राचीन सीढ़ियां सामने आईं। इन पर अंकित शिलालेख के अनुसार, इनका निर्माण संवत 2015 में स्वर्गीय श्रीमती यशोदा देवी की पुण्य स्मृति में उनके पुत्र भगोले, बद्री प्रसाद मुनीम एवं रामशरण रावी, निवासी सकरौरा, कर्नलगंज द्वारा कराया गया था। इस खोज को स्थानीय लोग स्थल के ऐतिहासिक महत्व का महत्वपूर्ण प्रमाण मान रहे हैं।
महर्षि अगस्त्य मुनि की तपोस्थली होने की स्थानीय मान्यता।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ग्राम सभा सुदीया क्षेत्र में प्राचीन काल में महर्षि अगस्त्य मुनि ने अपना आश्रम स्थापित किया था। कहा जाता है कि इसी स्थान पर उन्होंने वर्षों तक तपस्या की और बाद में यहां ब्रह्मचारी बाबा का स्थान स्थापित हुआ।

रामायण काल से जोड़कर देखते हैं श्रद्धालु।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकरौरा घाट के समीप स्थित यह क्षेत्र रामायण काल से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम ने महर्षि अगस्त्य मुनि के आश्रम में आकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। आश्रम के निकट स्थित अगस्त कुंड को भी अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहां महर्षि अगस्त्य स्नान और तपस्या करते थे।

स्थानीय लोग बताते हैं कि कर्नलगंज का प्राचीन नाम सकरौरा था। इसी क्षेत्र में गोस्वामी तुलसीदास के गुरु नरहरिदास का आश्रम तथा प्रसिद्ध त्रिमुहानी संगम भी स्थित है, जिससे इस पूरे क्षेत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
संरक्षण की मांग हुई तेज।
अगस्त कुंड की खुदाई शुरू होने और प्राचीन सीढ़ियां मिलने के बाद क्षेत्रवासियों ने इस स्थल को पुरातात्विक एवं धार्मिक धरोहर घोषित कर संरक्षित करने की मांग तेज कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए और व्यवस्थित रूप से विकास किया जाए, तो यह धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
स्थानीय लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि अगस्त कुंड, आश्रम, समाधि स्थल तथा आसपास के पूरे परिसर का संरक्षण कराया जाए, अवैध कब्जों से मुक्त रखा जाए तथा इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जाए।
Author: HIND LEKHNI NEWS
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