माझगांव–जमुरावां–सीवन के हजारों किसानों की सांसें अटकी जनप्रतिनिधियों से गुहार के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
महराजगंज/रायबरेली, विकास के दावों के बीच महराजगंज क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण पुल आज अपनी बदहाली की कहानी स्वयं बयां कर रहा है। पूरे डींगुर मजरे माझगांव के पास नाले पर बना यह पुल पूरी तरह जर्जर और क्षतिग्रस्त हो चुका है। पुल के दोनों किनारों की दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं तथा निर्माण का बड़ा हिस्सा कमजोर हो गया है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
यह पुल माझगांव, जमुरावा और सीवन ग्राम सभाओं के ग्रामीणों और किसानों के लिए मुख्य आवागमन का एकमात्र सुगम मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों किसान इसी रास्ते से अपने खेतों तक पहुंचते हैं। राजेश कुमार, रूद्र प्रसाद त्रिपाठी, उमाशंकर त्रिपाठी, सुनील सिंह, जगन्नाथ, श्री राम, राम शंकर लोधी, पारसनाथ, बैजनाथ, बाबूलाल पासवान सहित सैकड़ो ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गया तो उन्हें मात्र 100 मीटर की दूरी तय करने के बजाय 3 से 4 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर खेतों तक पहुंचना पड़ेगा। इससे समय, श्रम और कृषि लागत तीनों में भारी वृद्धि होगी।
ग्रामीणों के अनुसार इस जर्जर पुल की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्रीय विधायक और ब्लॉक प्रमुख को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। लगातार उपेक्षा के कारण ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
यह पुल माझगांव से जमुरावा ग्राम पंचायत के बार्डर से होते हुए हलोर को जोड़ने वाले नाले का जल निकासी मार्ग भी है और वर्षों से क्षेत्र की जीवनरेखा बना हुआ है। बरसात के मौसम में इसकी स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। ऐसे में किसी भी समय दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं शासन से मांग की है कि जनहित और संभावित दुर्घटना को देखते हुए पुल का तकनीकी निरीक्षण तत्काल कराया जाए तथा नए पुल के निर्माण या तत्काल मरम्मत के लिए शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि हजारों ग्रामीणों और किसानों को राहत मिल सके और किसी अनहोनी से पहले स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके। मामले में हमारे रिपोर्टर से मौजूदा विधायक श्याम सुंदर भारतीय की दूरभाष पर जब बात हुई तो उन्होंने बताया कि जानकारी मिली है जल्द से जल्द इस पुल का निर्माण कार्य कराया जाएगा।
Author: HIND LEKHNI NEWS
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