मिल्कीपुर, अयोध्या।खण्डासा थाना क्षेत्र के रामनगर अमावा सूफी गांव में वरिष्ठ पत्रकार पर हुए हमले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 74 वर्षीय बुजुर्ग पत्रकार गिरजा प्रसाद शुक्ल और उनके परिवार पर घर में घुसकर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे पीड़ित परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।बताया जाता है कि बीते 9 अप्रैल को लखनऊ से प्रकाशित हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़े पत्रकार गिरजा प्रसाद शुक्ल के बेटे-बेटी समेत पूरे परिवार पर गांव के ही दबंग प्राचार्य अवधेश शुक्ल और उनके साथियों ने अचानक हमला बोल दिया। घटना इतनी गंभीर थी कि पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि घटना के करीब 9 घंटे बाद और स्थानीय पत्रकारों के भारी दबाव के चलते ही क्षेत्राधिकारी मिल्कीपुर के हस्तक्षेप पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बावजूद पुलिस अब तक किसी भी नामजद आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
मुख्य आरोपी अवधेश शुक्ल का नाम पहले भी कई मामलों में सामने आ चुका है। खण्डासा थाने में ही पत्रकार चिंतामणि सिंह को धमकी देने और दवा व्यवसायी अंशुमान शुक्ल के साथ मारपीट के आरोप में मुकदमा दर्ज हो चुका है। इसके बावजूद उस पर कोई ठोस कार्रवाई न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। निरोधात्मक कार्रवाई तक नहीं, बढ़ा आक्रोश हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर घटना के बाद भी पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई निरोधात्मक कार्रवाई तक नहीं की। इससे स्थानीय पत्रकारों में भारी रोष व्याप्त है और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार महासंगठन मिल्कीपुर जल्द ही एक आपात बैठक बुलाने जा रहा है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। आंदोलन और धरना-प्रदर्शन जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
क्या पुलिस प्रशासन आरोपियों पर शिकंजा कस पाएगा या फिर दबंगों के हौसले यूं ही बुलंद रहेंगे?
फिलहाल पूरा मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा है।
Author: HIND LEKHNI NEWS
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